आप जब से मेहरबान होने लगे


आप जब से मेहरबान होने लगे,
काम मुश्किल भी आसान होने लगे।।
मंजिलों का मुझे कुछ पता ना था,
आप रास्तों की पहचान होने लगे।।
दूर रहकर हमेशा करीब ही लगे,
आप दिल में उतर जान होने लगे।।
कुछ ही रोज में आ गई तब्दीलीयां,
हम खुद से भी अनजान होने लगे।।
देख कर आपको भूल बैंठे जहाँ,
ख्वाब ऐसे भी उड़ान होने लगे।।
तीरगी की तलब ना रौशनी की फिक्र,
होठ खामोश भी मुस्कान होने लगे।।।

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बेबसी का तकाजा जरा दीखिये,
उसने सजदे में मेरे भी घर कर लिया।
मंजिलों का सबब रास्तों को पता,
हमने तेरे लिए हर सफर कर लिया।।
जान देने पे आये तो कुछ यूं हुआ,
हमने कातिल हवाले ही सर कर दिया।।
शामे तन्हाई उस पे तेरा ये सितम,
वेवजह अपनी आंखों को तर कर लिया।
आफते 'आरजू' पहले ही कम ना थी,
किस लिए ये दर्दे सफर कर लिया।।।



प्यार कुछ ऐसे बेहिसाब करने लगे,
खार को चूम कर गुलाब करने लगे।।
खुद ब खुद रुख पर रौनके परती,
आईने भी मुझसे जवाब करने लगे।।
हौसले उड़ानों पर थे कुछ इस तरह,
पानी को छूकर शराब करने लगे।।।
उलझनों को आपकी पायल बना दिया,
हसरतों को यूं भी खाब करने लगे।।
उनके खामोश होठों की हंसी याद आयी,
जखम जब भी आवाज़ करने लगे।।



अवतार आरजू

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